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Dobhal Girish

Romance

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Dobhal Girish

Romance

निगाहों से गुनाह

निगाहों से गुनाह

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वो ये गुनाह सरे-आम करते हैं,

निगाहों से अपनी कत्ल-ए-आम करते हैं।


चला कर तीर नयनों से,

इल्जाम हमारे नाम करते हैं। 


गिरा कर हूस्न की बिजलियाँ,

क्यों जमाने को बदनाम करते हैं। 



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