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Dobhal Girish

Classics Others

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Dobhal Girish

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कुमुदिनी

कुमुदिनी

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 गोधूलि के रंग में कुमुदिनी मुस्काती,
शांत पवन संग अपनी गाथा सुनाती।
गुलाबी-सफेद पंखुड़ियाँ अद्भुत नृत्य रचातीं,
हर तरफ सुंदरता की पावन ज्योति जलाती।
तन सहारा कोमल सपनों का,
मिट्टी के रंग सजा रहे दर्पण प्रकृति का।
नरम पंखुड़ी, सुगंध मधुर, मन को भाए,
क्षणभर का सुख, पर अमिट छाप छोड़ जाए।
कहती है कुमुदिनी, जीवन का सार,
क्षणभंगुर पल भी होते अनमोल उपहार।
आशा का दीप, हर हृदय में जलाती,
प्रकृति संग जीवन के रंग सिखलाती। 
— डोभाल गिरीश 


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