STORYMIRROR

Kavita Verma

Tragedy

4  

Kavita Verma

Tragedy

नदी बहती है

नदी बहती है

1 min
679


नदी तो बहती है बनाते अपने रास्ते

पार करते पहाड़ पत्थर खड्ड और खाइयाँ 

और बताती चलती है

अपने बहने की दिशा 

इन्हें पार करते हुए किलकती है

हँसती खिलखिलाती लड़ती है

और बढ़ती जाती है

किसी अल्हड़ लड़की सी 

घर भर से लड़ते झगड़ते 

अपनी राह बनाने। 


पार कर इन अवरोधों को

जब पाती है गहन गहराई

तब मुश्किल होता है जान पाना

कि नदी किस दिशा में बहती है?

जैसे चूल्हे के पास चुपचाप बैठी स्त्री 

नहीं जान पाता कोई क्या सोच रही है? 

खुश है किसी बात पर या है उदास 

लेकिन नदी तो बहती है 

स्त्री के मन में चल रहे किसी द्वंद की तरह 

चुपचाप। 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy