नासमझी : न करना ऐसी भूल...
नासमझी : न करना ऐसी भूल...
कम उम्र में की गई
भावुकतापूर्ण संपर्क,
नासमझी में
तथाकथित लगाव या प्रेम (?)
ले डूबेगी तुम्हें, ऐ नादानों !
न करना ऐसा
कोई काम कि
अपनों से
मुंह छुपाए
जीना पड़े तुम्हें...।
ये तुम जान लो, ऐ नादानों !
करना न कोई नादानी तुम
कि लगने लगे माँ-बाप ही
शत्रु-सम तुम्हें...
उनसे बढ़कर कोई
न अपना तुम्हारा !
ये तुम जान लो...
अपने मन में
गाँठ बांध लो...
जब पेट की
आग लगेगी तुम्हें,
सर से प्यार का
भूत उतर ही जाएगा...ऐ नादानों !
जब जीविकोपार्जन हेतु
दर-ब-दर भटकना पड़ेगा तुम्हें,
तभी तुम्हें एहसास होगा
इस दुनिया में उस
कड़वे सच का...
जब तक तुम्हारी
औकात नहीं
दो वक्त की
रोटी कमाने की,
न करना विश्वासघात तुम
अपने माँ-बाप से, ऐ नादानों !
वो पाप है...
अपने अंतर्मन में
सत्य की आराधना करो...
अपने दिमाग का भी इस्तेमाल करो !!
तुम कोई ऐसा
दुस्साहस न करो
कि अपनों से ही
मुंह छुपाए जीना पड़े...
प्रेम एक पवित्र रिश्ते का नाम है...
दिल से दिल की मुलाक़ात तो
ऊपरवाले की देन है...
वक्त का काम वक्त आने पे ही करो;
भावविभोर होकर मोहपाश में बंधकर
कोई संपर्क न सांधो, ऐ नादानों !
तुम सही समय का इंतज़ार करो...
घर से चोरी-छिपे भाग निकलने की
नादानी न करो...
अपने माँ-बाप के
दिल की आवाज़ तो सुनो,
ऐ नादानों !
नासमझी में कोई भूल न करो...
