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Kanchan Prabha

Classics


4.8  

Kanchan Prabha

Classics


नारी तेरे कितने रूप

नारी तेरे कितने रूप

1 min 552 1 min 552

नारी त्याग की मूरत तू

नारी दया की सूरत तू

नारी तुझमे माँ की ममता 

मोती जैसा प्रेम है झड़ता


नारी तुझमे बहन का प्यार 

गर्मी में लगे ठंडी ब्यार

नारी तुम घटा घनघोर

बादल में हो पवन का शोर


नारी तुम ही शुप्रभात 

नारी तुम ही काली रात

नारी के हैं कितने रूप

नारी छाया नारी धूप


नारी प्रेम प्रणय का बंधन

कभी झाड़ी कभी हो उपवन

नारी होऊँ मैं हर जन्म

नारी तम्हें सत सत नमन।


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