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GOPAL RAM DANSENA

Abstract Classics

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GOPAL RAM DANSENA

Abstract Classics

तुम हमारे लिए हो

तुम हमारे लिए हो

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जब से तुम्हें देखा मैंने

बदला नजर की नजरिया

ख्वाब सजने लगे मन में

ऐसे नहीं था पहले कभी

हर सुबह रंगीन नजारे लिए हो

लगता है हमें तुम हमारे लिए हो।


मंजिल जिसके द्वार खुशियां है

जीवन संवारती तुम वहां

हसीन पलों को समेटे

कदमों को चूमती बसंती धरती

हरदम लगे, आसमा चांद तारे लिए हो

लगता है हमें तुम हमारे लिए हो।


नजरों को धोखा हो जाये शायद

दिल को आभास है हमेशा

तुम्हारे हर धड़कन की स्पन्दन

खामोश कह जाती है हर बात

जैसे हर अदाएं इशारे लिए हो

लगता है हमें तुम हमारे लिए हो।


कह न पाऊँ शायद तुम्हें

कभी अपने दिल की बात

पर तुम्हें पाया है हमने

इतने दिल के पास

यहीं सुकून मन जैसे सहारे लिए हो

लगता है हमें तुम हमारे लिए हो।


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