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Bhavna Thaker

Classics

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Bhavna Thaker

Classics

ख़लता है

ख़लता है

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कुछ लम्हों का आना तुम्हारा ख़लता है,

दिन भर तुम्हारा खयाल साथ चलता है।


मत जाओ यूँ हाथ छुड़ाकर रुक जाओ, 

दूरी के खौफ़ से नाजुक दिल धड़कता है।


जाना नहीं तुम्हारा दिल को रास आए,

मौसम यादों का कहाँ टाले से टलता है।


इश्क की आग ये कैसी उठी तन-मन में,

मन आँगन में प्यार का बादल बरसता है।


हर आहट पर चौंक कर देखूँ घबराकर,

जब तू जाने को कदम बाहर रखता है।


आसमान तू मन का ज़मीन ख़यालो की,

बिन तुम्हारे  रूह का टुकड़ा तड़पता है।


कहो करूँ क्या जतन तुम्हारी ख़िदमत में, 

आगोश में छुपकर तेरी तन पिघलता है।


दूरी पर तेरी घबराए दिल मत जाओ ना,

पल-पल तुझको पाने दिल मचलता है।


जाने की ज़िद ये तेरी मार ही ड़ालेगी,

बरसाती मौसम में तन मेरा सुलगता है।


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