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Dr. Tulika Das

Classics Inspirational

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Dr. Tulika Das

Classics Inspirational

सीख रही हूं मैं रोज नयी सीख

सीख रही हूं मैं रोज नयी सीख

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सीख रही हूं मैं

रोज नयी सीख।

घर की दीवारों से

दहलीज के बाहर तक

दिन के उजाले से

रात के अंधेरे तक


जाने कितने सबक लिखती हैं जिंदगी

कभी मन के कोरे पन्नों पर

कभी वजूद की परतों पर।

कभी हालात किताब बन जाते हैं

कभी वक्त स्याही - कलम ले आती है।


राह का पत्थर भी सीख दे जाता है

ठोकर लगे तो दर्द भी सबक पढ़ा देता है।

कभी अपने इम्तिहान बन जाते हैं

कभी आईने सवाल पूछते हैं

हार तो सबक सिखाती ही है

कभी जीत भी सीख दे जाती है।


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