मूलधन से ज़्यादा लागत है
मूलधन से ज़्यादा लागत है
अब मेरी श्रद्धा, मेरी युक्ति, मेरी भक्ति,
कोई दिखावा नहीं है बल्कि हकीकत है !
अपने गुरु की सतत महिमा गा सकूं,
मेरी समृद्ध लेखनी में इतनी ताकत है !
समय के बदलने से भाव बदलते नहीं,
बदले जो इंसान तो यह एक आफत है !
प्रेम एक ऐसा निस्वार्थ भाव है जिसमें,
मूलधन से ज्यादा व्यय होता लागत है !
जीवन एक ऐसा विशाल रंगमंच है जहां,
सबके हिस्से का किरदार आवत जावत है !
