STORYMIRROR

V. Aaradhyaa

Drama Classics

4  

V. Aaradhyaa

Drama Classics

मूलधन से ज़्यादा लागत है

मूलधन से ज़्यादा लागत है

1 min
207

अब मेरी श्रद्धा, मेरी युक्ति, मेरी भक्ति, 

कोई दिखावा नहीं है बल्कि हकीकत है !


अपने गुरु की सतत महिमा गा सकूं,

मेरी समृद्ध लेखनी में इतनी ताकत है !


समय के बदलने से भाव बदलते नहीं,

बदले जो इंसान तो यह एक आफत है !


प्रेम एक ऐसा निस्वार्थ भाव है जिसमें,

मूलधन से ज्यादा व्यय होता लागत है !


जीवन एक ऐसा विशाल रंगमंच है जहां,

सबके हिस्से का किरदार आवत जावत है !


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama