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AVINASH KUMAR

Romance

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AVINASH KUMAR

Romance

मुझे समझते नही हो

मुझे समझते नही हो

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हो समझदार तुम पर मुझे समझते नहीं हो

है दिल मोम का तुम्हारा पर पिघलते नहीं हो,


तेरी यादें हैं दरिया पी लेता हूँ प्यास में हरबार

रहते हो आँखों में समंदर से ही घटते नहीं हो,


यह सारी कायनात बिन तुम्हारे है सदा अधूरी

मेरे बिखरे से आगोश में कभी सिमटते नहीं हो,


कोई खत हो तो जला दूँ हंसकर दोस्तों यूँ ही

हो सांसे हमारी कभी सीने से मिटते नहीं हो,


तुम्हारी दुनिया में कहीं भी बाकी ना रहे हम

मेरे तन्हा वज़ूद से कभी तुम निकलते नहीं हो,


है दिल का रिस्ता जुड़ गया है ज़िंदगी भर को

कच्चे धागों की मानिंद कभी चटकते नहीं हो,


हूँ खतावार बेशक पर बेवफा नहीं हूं मैं खुदा

अपनी ज़ुबाँ से तो एक बार भी कहते नहीं हो,


तुम्हे भुलाकर कहाँ जाऊं इस दुनिया में "कुमार"

तुम तो ख्वाब में भी मुझे कभी मिलते नहीं हो--------------


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