मुहब्बत का कत्ल
मुहब्बत का कत्ल
वो मेरे नैनों में है,
मैं उसके नैनों हूँ,
फिर भी एक वहम के तिनके ने आग लगा दी है।
वो मेरे मन में है,
मैं उसके मन में हूं,
फिर भी यह मन में खयालों का तूफ़ान चल रहा है।
वो मेरे ख्वाबों में है,
मैं उसके ख्वाबों हूं,
फिर भी ख्वाबों का महल अब टूटने जा रहा है।
वो मेरे दिल में है,
मैं उसके दिल में हूं,
फिर भी मामूली सी बात ने राई का पर्वत बना रखा है।
वो भी आज जिंदा है,
मैं भी आज जिंदा हूं,
कत्ल आज "मुरली" की पुरानी मुहब्बत का हुआ है।

