STORYMIRROR

सीमा शर्मा सृजिता

Classics

4  

सीमा शर्मा सृजिता

Classics

मलाल

मलाल

1 min
293

ताउम्र तमन्नाओं को 

रहेगा ये मलाल

कि कुछ का ही सही 

मगर हो पाता पूर्णता से मिलन 

कि खाक होने से पहले

 वो भी ले पातीं

आजाद हवा में आजाद सांसें 


कि राख होने से पहले 

वो भी कह पातीं

अपने दिल की चंद बातें 

उनका यूं घुट घुटकर 

खुद में ही दफन होना 


महज दूसरों की खुशी के लिए

चुभता है बहुत 

जख्म आया जो हिस्से में 

कि दुखता है बहुत 

सच में ताउम्र तमन्नाओं को 


रहेगा ये मलाल 

काश ! कोई समझ पाता 

बिखरने के बाद का हाल।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics