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Khalida Shaikh

Tragedy

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Khalida Shaikh

Tragedy

मकाम

मकाम

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ये कौन सा मकाम है

जहां ना तुम हो 

ना तुम्हारा साया है

अकेलापन महसूस करके

ये जी बहोत घबराया है


ये क्यूं जहन मे

अजीब सी हलचल है

ना तुम मिले हो

ना कोई मिलने की उम्मीद है


चाहत भी कितनी अजीब है

ना रूकती है ना थमती है

दिल को हमेशा बेकरारी सी

जरुर कर छोड देती 


कुछ अनकही बातें 

हमेशा तडपाती रहती हैं

अधूरे से ख्वाॅब दिल मे

करवट बदलते रहते हैं


कुछ रिश्ते बनते भी नही

और बिगड भी जाते हैं

गहरा घाव दिल पर छोड कर

अनजाने होकर रह जाते हैं


अक्सर ऐसा क्यूँ होता हैं

अनजाने अपने से क्यूं लगते हैं

भूलना चाहो तो भूला नहीं पाते 

यादों को उनकी दिल से निकाल नहीं पाते 


समय तो बडा तेजी से गुजरता है

पर ऐसा क्यूँ लगता हैं कभी कभी

जिंदगी का पल भी नहीं गुजरा अभी

और कभी पूरी जिंदगी गुजर गई


यहीं सोचकर घबराते हैं

मंजिल की तलाश में भटकते रहते हैं।



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