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shaifali khaitan

Romance

4  

shaifali khaitan

Romance

मिलन की आस

मिलन की आस

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आज अम्बर को भी रंग चढ़ा है,प्रीत का

यही मिलन का वक़्त है, मीत से मीत का।


आज अम्बर भी ऐसा रचा है,

मानो दुल्हन की भांति सजा है।

गुलाबी रंग तो इस पर ऐसा जंचा है,

जैसे इसी के लिए बना है।

 

मानो पर्वत भी ऐसे स्थिर है,

जैसे वही साक्षी बनेे हैं इस अद्भुत दृश्य के।

मानो हवाएं भी बेसब्र है,

जैसे शहनाई बन गूंजने को।

मानो नदियां आज शांत है,

अपनोंं से बिछड़ने के गम में।


मानो चंद्रमा भी इस कदर आतुर है,

जैसे वही सागर की गहराइयों तक

पहुंचकर उसे उत्तेजित कर रहा हो।


सागर भी मिलन की बेताबी में

कोशिश कर रहा है ऊंचाइयां छूने की।

उम्मीद बाकी है अभी भी मिलन की।


कल फिर सूर्योदय होगा,

नई उमंग और नई चेतना के साथ

फिर से जागृत करने को

वही साहस और वही जज्बा।


आज अम्बर भी धरती पर उतरेगा।

आज बादल भी सितारों से

डोली सजा कर लाएंगे।


काश ! यह मिलन हो पाता

अम्बर भी चादर बनकर

धरती पर उतर आता।

सागर भी अपनी गहराइयोंं को

छोड़कर ऊंचाइयों को छू पाता।

काश ! यह मिलन हो पाता।


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