STORYMIRROR

shaifali khaitan

Abstract

4  

shaifali khaitan

Abstract

माँ जादू की पुड़िया

माँ जादू की पुड़िया

1 min
184

मेरी माँ जादु की पुडिया

मैं हूँ उसकी प्यारी गुड़िया


चाँद से भी शीतल हैं

उसके आंचल की छाया


छुप जाऊ तेरे आँचल के चीर में

जैसे छुपा है मोती सागर के नीर में


माँ के हाथों का स्वाद ऐसा भाया

मुझे दूसरा और कुछ नहीं लुभाया


पर्वत सी स्थिर मेरी माँ

शांत गंभीर मेरी माँ


बिन बोले ही सब समझ लेती है, माँ

मेरे मन के दर्द को पढ़ लेती है,माँ


मार्गदर्शक बन सब कुछ सिखाती है माँ

कठिन राहें आसान बनाती है माँ


माँ के चरणों में मेरी दुनिया

माँ मेरी जादु की पुडिया

मैं हूँ उसकी प्यारी गुड़िया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract