STORYMIRROR

shaifali khaitan

Inspirational

3  

shaifali khaitan

Inspirational

प्रकृति का प्रहार

प्रकृति का प्रहार

1 min
293


हाथों में सस्त्र ठान लिया है

रूप चंडी का धर लिया है

नव सर्जन का मानस बना लिया है।

 

ममता का आँचल फैलाये जो बैठी थी

आज उसने ही संहार किया है

भरते हुए पाप के घड़े का विनाश किया है।

 

खूब सहे थे घात उसने

आज आत्मरक्षा के लिए प्रहार किया है

खुद का श्रृंगार किया है।

 

जै कोई उतर आया मैदान में

बच न पाया इसके प्रहार से।

 

मुँह छुपाये बैठा है जग सारा

अंधकारमय है भविष्य सारा

स्वार्थ ने ही इसको है मारा।

 

स्वछता अपनाओगे

प्रदुषण घटाओगे

तो उज्जवल भविष्य फिर से पाओगे।


 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational