मीत मेरे
मीत मेरे
तू ही मेरा मीत है
तू ही मेरी प्रीत है
तू ही हार मेरी
तू ही मेरी जीत है
घटाओं सी गहरी तुम
जाड़ों कीी दुपहरी तुम
महके जो पल प्रतिपल
यादें वे सुनहरी तुम
सन्नाटे में हलचल तुम
नदियों की कल-कल तुम
पूर्णिमा की चांदनी बन
बिछी हुई मखमल तुम
बहारों कीी महफिल की
तू ही मेरी रीत है
पत्तों कीी सरसराहट में
भौरों की गुनगुनाहट में
तुम ही तो बसती हो
अधरों की मुस्कराहट में
न चांद में न तारों में
न साांस में न भोरों में
बस गई हो तुम कब से
बूंद बूंद मेेर पोरों में
हर बिखरे श्वासों में
तू जुड़ी संगीत है
तू ही मेरा मीत है
तू ही मेरी प्रीत है !

