महकती फ़िज़ा
महकती फ़िज़ा
समा बना है आज मस्त सुहाना,
रंगबिरंगी बना है शाम का नज़ारा,
महकती फ़िज़ा लहरा रही है ओ सनम,
मुझसे मिलन करने जरूर तू आना।
सितारों के साथ हे मेरा रिश्ता पुराना,
चाहता हूँ उसके संग महेफ़िल जमाना,
महकती फ़िज़ा लहरा रही है ओ सनम,
महफ़िल में आ कर तू रंगत जमाना।
मेरे इश्क का तू इजहार जरूर करना,
सुहाना समा में तू इन्तज़ार न कराना,
महकती फ़िज़ा लहरा रही है ओ सनम,
इस फ़िज़ा में मुझे तू मदहोश बनाना।
अब न तड़पाना और न मुझे तरसाना,
तेरे इश्क के लिये मैं बन गया हूँ दीवाना,
महकती फ़िज़ा मुझे बहकाती है "मुरली",
दौड़कर मेरी बांहों में तू समा जाना।

