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सोनी गुप्ता

Romance

4  

सोनी गुप्ता

Romance

मेरी कलम

मेरी कलम

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कलम जब इठलाती हुई चल पड़ी कागज़ पर 

लिखा उसने कुछ ऐसा नया आगाज़ बन गया

भावनाओं संग चली थी किसी का सरताज़ बन गया 

अपने विचारों को उडेला जब प्यार से 

कुछ ऐसा लिखा जो पाठकों के मन को छू गया 


कहीं क्रांति कहीं ज्वाला तो कहीं प्रेरणा स्रोत 

हर शैली में लिख कर सबको प्रभावित कर दिया 

कभी दुःख में सुख की अनुभूति दिलाकर 

लेखन को तुमने अपने आकार में बुन दिया 


फुर्सत के कुछ पल मिले थाम लिया तुम्हें हाथों में 

साथ जब मेरे चले तुमने इतिहास बदल दिया 

कुछ बातें अंतर्मन मन थी गूंज रही 

उन बातों को भावनाओं का रुख देकर 

जाने कितने लोगों को तुमने आईना दिखा दिया 


बात दिल में थी बरसों से जो उनसे ना कह सके

तुम्हारा स्पर्श होते ही लिख दिया मन की बातों को 

लिख दी मन की बात तो हमें कवि ही बना दिया 

कलम जब इठलाती हुई चल पड़ी कागज़ पर 

लिखा उसने कुछ ऐसा नया आगाज़ बन गया I 

 



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