STORYMIRROR

Veena Mishra ( Ratna )

Abstract

3  

Veena Mishra ( Ratna )

Abstract

मेरी जेब

मेरी जेब

1 min
271

सिक्कों की खनक नहीं है तो क्या,

जेब मेरी आज फटी है तो क्या।

मगर कम नहीं मेरा हौसला,

रुपैया ही नहीं सबसे बड़ा।


किस्मत से मैं लेकर लोहा,

स्याह मिटा, लाऊँगा नया सबेरा।

जेब मेरी आज फटी है तो क्या।

जिंदगी थोड़ी कड़ी है तो क्या,

मेहनत को हमसफ़र जब बना लिया,

दौलत भला अब चीज है क्या।


फटी जेब का भेद है मिटाना,

हीरे सा मुझको है चमकना।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract