Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF
Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF

Veena Mishra ( Ratna )

Abstract


4.3  

Veena Mishra ( Ratna )

Abstract


उम्मीद

उम्मीद

1 min 261 1 min 261

जिंदगी चले उम्मीद के सहारे ,

मन तू क्यों हिम्मत हारे।

माना कि नींद नहीं आँखों में,

चैन कहाँ अब बातों में।

विरान दिखे शहर सारा,

डरा सहमा मानव बेचारा।

इक विषाणु के समक्ष ये जग हारा,

दिखे न कहीं कोई सहारा।

मगर एक दिन तो इस चक्रव्यूह को भेद देंगे,

मन तू क्यों हिम्मत हारे ,

जिंदगी चले उम्मीद के सहारे।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Veena Mishra ( Ratna )

Similar hindi poem from Abstract