मेरी हालत
मेरी हालत
तेरे बिना सुबहमें मुजे बैचेनी लगती है,
अगर तेरा चहेरा मै न देखूं तो,
ये दिन मुजे सूमशान लगता है।
तेरा बिना रातमें मेरी तन्हाईयांँ बढती है,
अगर तुजसे मीलन मै न करुं तो,
ये रात भी अमास लगती है।
तेरे बिना ये घटा मुजे पतझड़ लगती है,
अगर ईस घटामें तूं न हो तो,
मेरे बेकरारी हरपल बढती है।
तेरे बिना ये दिल मेरा बेताब बन जाता है,
अगर तेरी धडकन न मिले तो,
मेरा दिल पथ्थर बन जाता है।
तेरे बिना ये कलम मेरी मायूस बन जाती है,
अगर तेरे अल्फाज़ न सूनें तो "मुरली",
मेरी गज़ल अधूरी रह जाती है।

