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deepshikha divakar

Tragedy

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deepshikha divakar

Tragedy

मेरी आजादी

मेरी आजादी

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ये आजादी तुमको मुबारक

ये शान शौकत तुमको मुबारक

 

ये अल्हड़ हसी तुम्हें मुबारक 

ये बेबाक बातें तुम्हें मुबारक


मैं तो अभी भी जकड़ी हूँ

इन प्रथाओं से पकड़ी हूँ


मैं ना मुस्कुरा सकती हूँ

मैं ना बाहर जा सकती हूं 


मेरी डोर समाज के हाथ हैं

मेरी आजादी कल की बात है


ये कल कभी आता नहीं 

मेरी स्वाधीनता लाता नहीं


माँ की कोख में भी आजाद नहीं

जन्म लेने का हक भी नहीं


मेरी आजादी है कहां 

मेरी दुनिया है कहां 


हर कोई नोचे मुझे यहां 

मेरी आजादी है कहां

मेरी आजादी है कहां।


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