मेरे शम्भू हे कैलाशी
मेरे शम्भू हे कैलाशी
मेरे शम्भू हे कैलाशी
दया तू इतनी कर देना
भटके मेरा चंचल मन तो
राह जरा बतला देना।।
तू ही मेरे मात-पिता हो
मुझ पर नेह सदा रखना
मुझसे कोई भूली हुई तो
नाथ मुझे क्षमा करना
संगत ना हो दुर्जन का
तू इतना काबिल कर देना
भटके मेरा चंचल मन तो
राह जरा बतला देना।।
मैं हूँ एक अबोध सा बालक
सही गलत पहचानुँ ना
है क्या धर्म अधर्म जगत में
अज्ञानी मैं जानूँ ना
हाथ पकड़ स्वामी मेरे
भवसागर पार करा देना
भटके मेरा चंचल मन तो
राह जरा बतलाया देना।।
