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Sonam Kewat

Tragedy Inspirational

4  

Sonam Kewat

Tragedy Inspirational

मेरे जिंदगी की किताब

मेरे जिंदगी की किताब

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मैंने सब कुछ शुरू किया 

एक शुन्य को पकड़कर 

पर पुण्य ने पकड़ रखा था

वाकई में मुझे जकड़ कर 


कभी मेरे मन में लोगों के लिए

वहाँ कोई छलावा नहीं था 

मेरे साथ देने के लिए उस वक्त

कोई मेरे अलावा नहीं था 


जिंदगी ने तो ठुकराया मुझे

ना जाने कितनी बार 

फिर सोचा छोड़ो जाने दो 

ऐसा तो हमेशा होता है यार 


जिंदगी के साथ लोगों ने भी

हमेशा ही आजमाया मुझे 

मैं उठना चाहती थी पर 

ठोकरें लगा कर गिराया मुझे 


मौत की कगार पर जा रहीं थी

तो जिंदगी ने कुछ खास दिया

बदले की भावना में मैंने खुद पर 

ना जाने कितना अत्याचार किया


जो दर्द मिला था एक मोड़ पर

मुझे वो सब वसूल हो गया 

जिंदगी की किताब जैसे भी हो

अब मुझे पढ़ना कबूल हो गया


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