मेरे गोविंद, ओ गोपाला।
मेरे गोविंद, ओ गोपाला।
मेरे गोविन्द, ओ गोपाला
तुम्हीं संग मन, बांध डाला..
प्रियतम हो , हृदय तम हो
तुम्हीं तो प्यारे हरि मन हो ..
तुम्हारे सिवा, ना कुछ चाहूं
हरि मन भाए, मोहन राह हूं..
तुम्हें देखूं मैं सपनों में,
अब सपनों से बाहर चाहूं..
तुम्हें देखूं मैं नयनों में,
अब अपने दिल में बसा पाऊं..
रहो मोहन हृदय की नगरी,
जहां पर दिल का प्यार रहें..
जहां पर प्रेम अपार रहें,
जहां पर मन का इंतजार रहें..
ओ गोविंद जी, ओ हरि मन ही
तुम रख लेना हमें प्रभु,
अपने चरणन में कहीं..
जहां पर हर एतबार रहें,
जहां पर जीवन सार रहें..
मेरे गोविन्द, ओ गोपाला
तुम्हीं संग मन, बांध डाला.......
