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Manju Joshi

Abstract

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Manju Joshi

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उदासी

उदासी

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उदास मन हो तो जहाँ वीरान लगता है, 

हर कोई जाना-पहचाना भी अनजान लगता है, 

मन से भाव गंभीर कुछ इस तरह जुड़ चुके हैं, 

अपने ही दर्द को सहलाना 

सबके घावों पर मरहम के समान लगता है।।


               


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