STORYMIRROR

neha chaudhary

Tragedy

4  

neha chaudhary

Tragedy

मेरे अस्तित्व पर सवाल आया है

मेरे अस्तित्व पर सवाल आया है

1 min
321

माँ आज उसने फिर मुझे पैसे से तोला है

मेरे अस्तित्व को आज फिर झकझोरा है

बात बात पर धमकी देता है वो

कहता है चली जा अपने घर, जो तेरा हो l

बता ना, मैं कौन से घर जाऊं

माँ, मैं किसे अपना बताऊं......

उस घर को जिसमे गालियों से होता है स्वागत

या उसे, जो नहीं है मेरा, परंपरागत

माँ बता ना, मैं कैसे अपना अस्तित्व बनाऊ....

तूने हाथों को पीला करके, भेज दिया ऐसे

हूँ पहाड़, मैं तेरे ऊपर जैसे

माँ उसने फिर  वही दोहराया है

माँ मेरे अस्तित्व पर सवाल आया है l

माँ मेरे अस्तित्व पर सवाल आया है.............


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy