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Anuradha Sharma

Fantasy

4  

Anuradha Sharma

Fantasy

मेरा प्यारा स्कूटर।

मेरा प्यारा स्कूटर।

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कभी आया था वो नया नवेला l 


फूलों से सजा, चमक से भरा,

इतराता हुआ, जैसे मंद मंद मुस्कुराता हुआ। 

सुंदरता का गुरूर, था वो मटमैला,

कभी आया था वो नया नवेला l 


नारियल से सत्कार हुआ, लाल सिन्दूर से तिलक,

ख़ुशी की लहर थी घर में, माँ के आंसू गए थे छलकl 

हमारा नया सदस्य, वाहन था वो पहला,

कभी आया था वो नया नवेला। 


उम्र के साथ सब पुर्जे उसके आवाज़ करने लगे, 

नयी पीढ़ी को उसके मरम्मत के खर्चे खटकने लगे। 

सोचा न था, उससे व्यवहार हो जाएगा सौतेला,

कभी आया था वो नया नवेला। 


शान से आँगन में इठलाने वाला, आज अकेला खड़ा है,

बढ़ती उम्र में भी सेवा करने को अड़ा है। 

मेरी यादों में हमेशा रहेगा ये अलबेला,

कभी आया था वो नया नवेला। 


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