मेरा दोस्त
मेरा दोस्त
वो जो मेरा साथ निभाता !
हँसी- खुशी में मज़ाक का पात्र बन जाता!
चाहे उसे मैं कभी कितना भी कोसूँ !
मगर वो किस्मत से मिला कोहिनूर था वो !
मेरी मुसीबतों में खुद वो ढाल बन जाता।
वह कोई और नहीं, वही मित्र है मेरा, मेरा दोस्त !
हाँ ! वही मित्र जिसकी यादें हमसे जुड़ी हुई है !
बचपन की वो लुका-छिपी का खेल !
कभी दोस्ती ! कभी लड़ाई !
मेरा रूठना, उसका मनाना !
उसकी खिलखिलाहट मेरी प्यार भरी इक हल्की मुस्कान !
कभी मेरी हरफ़नमौला हार ! कभी मेरे जज्बातों की जीत !
हार पर चिढ़ना, उसके जीत पर भिड़ना !
चलता रहता था ये सब जीवन की रेस में !
उसका कभी मुरझाकर रूठना, मेरा रिझकर मनाना !
उम्र के इस पड़ाव पे न जाने कहाँ छूट गया ये सब !
अब वक्त ही हमेशा के लिए रूठ गया मुझसे !
बीती हुई बचपन की सब बातें अब रह- रहकर याद आती है !
मेरी जरूरतों को समझना,
मेरी हर बात को दिल से परखना !
हर बार गलतियों पर गौर करना !
मेरी रूचि का भान !
और खुशियों का दुनिया जहान !
