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कीर्ति जायसवाल

Drama Inspirational

5.0  

कीर्ति जायसवाल

Drama Inspirational

मछली आज उड़ना चाह रही

मछली आज उड़ना चाह रही

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मछली आज उड़ना चाह रही है;

मछली आज चलना चाह रही है।


नीरस हो चुकी है

वह इस समुद्र में रह-रह कर;

ऐसा कतई नहीं

पसंद नहीं उसे अपना देश;

वह तो पूरी दुनिया घूमना चाह रही है।


न तो उसके पास पग है;

न तो उसके पास पर है;

साँस भी उसकी उसी में ही अटकी हुई है;

वह उस दलदल से निकलना चाह रही है।


कोई तो उसे पग ला कर दे दो;

कोई तो उसे पर ला कर दे दो।


बहुत समय से वह

बहुत कुछ कहना चाह रही है;

कुछ न कह पाते हुए भी

वह आज सब कुछ कहना चाह रही है।


मछली आज उड़ना चाह रही है;

मछली आज चलना चाह रही है।।


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