STORYMIRROR

कीर्ति जायसवाल

Abstract

3  

कीर्ति जायसवाल

Abstract

ग़म की नदियाँ

ग़म की नदियाँ

1 min
29

मेरी आँखों से आँसू की ये नदियाँ खूब बहती हैं।

मेरे ग़म की कहानी को ये नदियाँ खूब कहती हैं।


समुंदर सूख सकता है, मेरे ग़म के झरोखों से,

मगर पत्थर की है दुनिया, मैं रोती हूँ तो हँसती है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract