कीर्ति जायसवाल
Abstract
मेरी आँखों से आँसू की ये नदियाँ खूब बहती हैं।
मेरे ग़म की कहानी को ये नदियाँ खूब कहती हैं।
समुंदर सूख सकता है, मेरे ग़म के झरोखों से,
मगर पत्थर की है दुनिया, मैं रोती हूँ तो हँसती है।
हिन्दी की बात
मेरा संघर्ष
बोलो, सीताराम...
ग़म की नदियाँ
बोलती कलम
अग़र वह एक बार...
मछली आज उड़ रह...
कोरोना ने क़हर...
कोरोना का कहर
इश्क़ अब, इस्बात माँगता है, मैं कलुषित नहीं, यह स्वयंभू जानता है। इश्क़ अब, इस्बात माँगता है, मैं कलुषित नहीं, यह स्वयंभू जानता है।
संस्कृत की प्यारी बेटी है, यह हमारी हिंदी। संस्कृत की प्यारी बेटी है, यह हमारी हिंदी।
जब कोई अपना किसी बात पर रूठ जाता है, एक प्यारी सी मुस्कान उसे पल में मना लेती है, जब कोई अपना किसी बात पर रूठ जाता है, एक प्यारी सी मुस्कान उसे पल में मना लेती...
और पिया के हाथ में चाय का कप तैयार मिले और पिया के हाथ में चाय का कप तैयार मिले
अनेकों रंगों से भरी हुई देखो ये रंगोली। अनेकों रंगों से भरी हुई देखो ये रंगोली।
हो गई मैं हकीक़त की नाव पर सवार, साथ में ली मैंने ख़यालों की पतवार। हो गई मैं हकीक़त की नाव पर सवार, साथ में ली मैंने ख़यालों की पतवार।
धरती निवासियों को दे सद्बुद्धि ये उत्तरायण ! धरती निवासियों को दे सद्बुद्धि ये उत्तरायण !
इस दुनिया को जो स्वर्ग बना दे वह मुकम्मल मुकाम है माँ इस दुनिया को जो स्वर्ग बना दे वह मुकम्मल मुकाम है माँ
हम हमारी खुशी के कारण क्यों ? बन जाय बेजुबान के लिए हैवान ! हम हमारी खुशी के कारण क्यों ? बन जाय बेजुबान के लिए हैवान !
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं सच में कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं। कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं सच में कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं।
सहायता जो अपार दें सबको उनके लिए मेरे ईश्वर ना बनना कभी हैवान। सहायता जो अपार दें सबको उनके लिए मेरे ईश्वर ना बनना कभी हैवान।
जिंदगी की चंद सीढ़ियां चढ़ते ही, रुक गया है मेरा वर्तमान। जिंदगी की चंद सीढ़ियां चढ़ते ही, रुक गया है मेरा वर्तमान।
अभिलाषा मेरी यही, वसौ तिहारे घाट। दरश परश मज्जन करौ, तजौ सकल भव ठाट।। अभिलाषा मेरी यही, वसौ तिहारे घाट। दरश परश मज्जन करौ, तजौ सकल भव ठाट।।
गौण रहा जो सदा जगत में, स्वर्णिम लगता देखो मरुथल। गौण रहा जो सदा जगत में, स्वर्णिम लगता देखो मरुथल।
प्रयास जारी है,आप भी करो इस दुर्लभ जन्म के क्यों की खोज की ! प्रयास जारी है,आप भी करो इस दुर्लभ जन्म के क्यों की खोज की !
तुम आओगे कश्ती बनकर, बस यही सोच रही हूं। तुम आओगे कश्ती बनकर, बस यही सोच रही हूं।
जीते हैं बस इस ख्वाहिश में, एक बार मिल लें गले इश्क में हम, इस कद्र जले। जीते हैं बस इस ख्वाहिश में, एक बार मिल लें गले इश्क में हम, इस कद्र जले।
जोर जोर से चिल्लाकर के, हौले हौले पतंग उड़ाई।। जोर जोर से चिल्लाकर के, हौले हौले पतंग उड़ाई।।
हां मुझे प्यार हुआ है मेरे देश मेरे खलियानों से देश रक्षक प्राणों से सभ्यता कीप्रतीक हां मुझे प्यार हुआ है मेरे देश मेरे खलियानों से देश रक्षक प्राणों से सभ...
सह जाती है सारे गम को छाह पंखों का देकर हरपल खुशियाँ देती है बच्चों को। सह जाती है सारे गम को छाह पंखों का देकर हरपल खुशियाँ देती है बच्चों को।