STORYMIRROR

अपर्णा गुप्ता

Abstract

3  

अपर्णा गुप्ता

Abstract

मेरे देश की मिट्टी

मेरे देश की मिट्टी

1 min
835

चन्दन जैसी मादकता है

मेरे देश की माटी में

चन्दा जैसी शीतलता है 

मेरे देश की माटी में


रोम रोम तक पगा हुआ है

देश प्रेम जगा हुआ है

फूलो जैसी सुन्दरता है 

मेरे देश की माटी में


गंगा जैसी पावनता है 

यमुना की सी सरलता है

मेरे देश की माटी में

रक्षा की सौगंध है मुझको


हौसले बुलन्द है तुझको

भगत सिंह की हुकांर भी है 

शेखर का सिहंनाद भी

गंगा जैसी पावनता भी है 


मेरे देश की माटी में

सत्यम, शिवम, सुन्दरम की

मिसाल है

ह्रदय हिमालय सा विशाल है


बसती है हर दिशा में

किसी बांसुरी की धुन

गीता का उपदेश कही पर

कही वेद मन्त्रो का गुजंन


मेरे देश की माटी में

सरहदो पर लाखो आंखे

बस दुश्मन पर अड़ी है 

देश मेरा देश तेरा 

देश की माटी बड़ी है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract