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अपर्णा गुप्ता

Others

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अपर्णा गुप्ता

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अकेला

अकेला

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माना कि अब कोई 

तलबगार ही नहीं है 

तबियत का कोई 

तीमारदार ही नहीं है 

मरने से पहले 

मरना नहीं चाहता

तू न कहना तुझे 

मुझसे प्यार ही नहीं है


उम्र गुजारी जिस 

घर में रहकर

जिसके दरींचे 

हवादार ही नहीं है 

सीखा था मैने ही 

सबके लिए जीना

अब कोई मेरा 

तलबगार ही नहीं है 


बनकर रहा परछाईं 

ताउम्र जिसकी मैं 

बैठा हूँ तन्हा यहाँ 

साया दीवार ही नहीं है


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