अकेला
अकेला
1 min
203
माना कि अब कोई
तलबगार ही नहीं है
तबियत का कोई
तीमारदार ही नहीं है
मरने से पहले
मरना नहीं चाहता
तू न कहना तुझे
मुझसे प्यार ही नहीं है
उम्र गुजारी जिस
घर में रहकर
जिसके दरींचे
हवादार ही नहीं है
सीखा था मैने ही
सबके लिए जीना
अब कोई मेरा
तलबगार ही नहीं है
बनकर रहा परछाईं
ताउम्र जिसकी मैं
बैठा हूँ तन्हा यहाँ
साया दीवार ही नहीं है
