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Mritunjay Patel

Tragedy Classics Inspirational

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Mritunjay Patel

Tragedy Classics Inspirational

मौत के अंधेरे से बाहर

मौत के अंधेरे से बाहर

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आसान नहीं होता मौत को गले लगा लेना,

हालात चीख़ती है, गुर्राती है, मुस्कुराती है।

इस खूबसूरत दुनियां में आदमी की ख्वा़हिशे 

 ललचाती है, डराती है, संघर्ष करने को सिखाती है।।


आदमी को ख्वा़हिशे ज़ल्दी मरने नहीं देती है

 मुसीबतों की बेडियों को तोड़ कर,

अपनी ख्वाहिशें हासिल करना चाहता है।

मरने से पहले कोई ख़ुद से सवाल यह करता है


मर कर भी क्या छोड़ जाऊंगा यादें,  

किसी के आँखों का आंसू, मज़बूरीयां या कायरता “

तो क्यों ख़ुद का आत्म हंता बनू,

लड़ेंगे उस काल से जो मुझे हालातों से जकड़ रखा है।


आज मैं अंधेरे से निकल कर चीख़ता हूँ

“लाख आये बाधाएं लेकिन हार नहीं मानूँगा, 

इसी विराट प्रकृति से मोहब्बत कर काली रात को हटा कर,

 सूरज की तरह सीना ताने निकलूँगा,  

उन हालातों पर एक गहरा थप्पड़ के निशां छोड़ जाऊँगा।


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