STORYMIRROR

प्रभात मिश्र

Fantasy

4  

प्रभात मिश्र

Fantasy

मैं

मैं

1 min
292

या गहन अंधकार हूँ या पूर्ण निर्विकार हूँ 

अथाह भव सिंधु के 

या आर हूँ या पार हूँ 

ना बीच मझधार हूँ 


या करुणतम् पुकार हूँ

या भीषण हुंकार हूँ 

अथाह सिंधु शांति का

या क्रूरतम् संहार हूँ 

मैं शक्ति का संचार हूँ


या वाक्य विस्तार हूँ

या मौन का प्रसार हूँ

अथाह विचार सिंधु में

प्रच्छन्नतम् विचार हूँ 

या सुलभ सा सार हूँ 


ना पुण्यों का भार हूँ

ना पाप का प्रसार हूँ

अथाह कर्म सिंधु से 

सृजित उपसंहार हूँ 

मैं कर्मफल विस्तार हूँ



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Fantasy