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Amit Kumar

Romance

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Amit Kumar

Romance

मैं भी वही....

मैं भी वही....

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मैं भी वही

तुम भी वही

रास्ते पर अलहदा 

ख़ामोश मंज़र है वही

बस अंदाज़ है उनका जुदा

तेरी फ़ितरत मेरी अदावत

मेरी अदा तेरी ज़ुबान

बात फिर वही आ गई है

जिस पर हुआ पहले भी

यह मसला खड़ा

तू है रहबर या खुदाया

तू है मंज़िल या खुदाया

मिज़ाज़ तेरा क्यों है जुदा

आओ ऐ हुस्न-ए- नूरानी

इश्क़ बुलाता है तुम्हे

मेरी हर आरज़ू है

तेरी ज़ुल्फों की घटा.


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