STORYMIRROR

shubham s. jaiswal

Tragedy Others

3  

shubham s. jaiswal

Tragedy Others

मैली सियासी

मैली सियासी

1 min
299

सड़क किनारे किन्नर

बजाए ढ़ोल बाजा

नगरी है यह अंधेर

टके सेर भाजी-खाजा

आए चुनाव में जीतकर

अंधों में काने राजा

सत्ता के लग गए पर

उड़ने लगे चौपट राजा

 

हल्ला-गुल्ला गली-गली में

मस्त मौलों की हस्ती है

 

बन्दूक दन-दन चली-चली रे

दंगाइयों की बस्ती है

 

तंग है मोहल्ला उचक्कों से

इंसानी जान बड़ी सस्ती है

 

सुस्त-भ्रष्ट शासन के तले

आम जनता ही पिसती है

 

बावजूद लाख योजनाओं के

विषैली गरीबी डसती है

 

अरिष्ड्वर्ग के चक्रव्यूह में

मनुष्य की मनुष्यता फँसती है

 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy