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shubham s. jaiswal

Others

5.0  

shubham s. jaiswal

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वर्ष-सप्तकम्

वर्ष-सप्तकम्

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कृषाण-कर्ण बूँद-गूँज हेतु ही तरस् रहे

निदाध से निराश वन्ध्य-भू सुधा-सुधा जपे


घटा घिरे घने व घोर चन्द्र से छिपे चकोर

मारि-मेघनाद-लोल टर्र-टर्र शल्लशोर्


घुमड् घुमड् घुमण्ड मण्डराए मेघमण्डली

अनन्त अन्ध यामिनी अभीक भीम दामिनी


सुशंस है सुरेन्द्र का वसुन्धरा सुगन्धिता

विशुद्ध-वर्ष-घोषणा शुभा-विभा दसों-दिशा


तधित् तधा तधित् तधा मयूर नाट-नाटिका

सुगात्र-नेत्रमुष् प्रसून-पात्र-पुष्प-वाटिका


विहार वारिधार खेत-खात-जाह्नवी रमे

फुहार-सार मेघराग बाल-बालिका रमे


किशोर-रश्मि धूमरी महेन्द्रचाप वे स्वयं

प्रणाम सोम-चक्र को व दण्डवत् करे शुभम्



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