STORYMIRROR

Jagrati Verma

Classics Children

4  

Jagrati Verma

Classics Children

माँ

माँ

1 min
225

एक औरत ने मुझे

मोतियोँ सा बिन माले में पिरोया है

इस बंजर धरती का फूल मैं,

उसने मुझे बोया है


तुझसे जान मेरी, 

तुझसे ही पहचानी हूँ

सिर्फ तेरा हक़ मुझपे 

माँ मै तेरी लिखी कहानी हूँ 


तुझसे अस्तित्व मेरा, 

मैं तेरी एक अधूरी कड़ी हूँ

मेरी रूह से ज्यादा

 माँ मैं तुझसे जुड़ी हूँ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics