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Jagrati Verma

Abstract

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Jagrati Verma

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ऐतबार

ऐतबार

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दिन के सूरज सी

जिंदगानी मेरी

रात भर तुम मेरा

ऐतबार करना

शाम होते ढल जाती

कहानी मेरी

तुम फिर सुबह तक 

मेरा इंतजार करना!


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