STORYMIRROR

Jagrati Verma

Abstract

3  

Jagrati Verma

Abstract

खुद में

खुद में

1 min
188

वो खुद में मगरूर रहता है

अपनी दुनिया में मशहूर रहता है

ना वास्ता किसी से, ना वास्ते किसी के

न जाने उसे कौन सा गुरुर रहता है


उसे फर्क नहीं पड़ता

वो कहता है

"मंज़िल की खबर नहीं मुझे

मेरा हमसफ़र ये सफ़र, ये रस्ता है!"


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract