Jagrati Verma
Thriller
तह कर के रख दी हैं तेरी यादें एक कोने में
कभी और इत्मीनान से इन्हें फिर खोलूंगी
दुबारा याद करके वो गुज़रे हुए पल
एक बार फिर...थोड़ा और रो लूंगी
तू याद बहुत आ...
ये कहानी यहीं...
रूप की चाहत स...
ऐतबार
खुद में
खानाबदोशों सा
हल
तह
एक दिन
ये हुनर हममें...
जो खयाल कभी आया नहीं क्या यह वह हकीकत है जो खयाल कभी आया नहीं क्या यह वह हकीकत है
फिर कहते आओ शक्तिमान हो जाता आने को मजबूर। फिर कहते आओ शक्तिमान हो जाता आने को मजबूर।
बेटी को फटकारते, जीते जी मारते मिले ऐसी ना फिर, दुत्कार मां दुत्कार मां बेटी को फटकारते, जीते जी मारते मिले ऐसी ना फिर, दुत्कार मां दुत्कार मां
मैं तेरे कहने पे आते नहीं तुझे नहीं चाहा इसलिए! मैं तेरे कहने पे आते नहीं तुझे नहीं चाहा इसलिए!
इस निविड़ बने जीवन में फिर से आनंद की इक लहर बह जाने दे। इस निविड़ बने जीवन में फिर से आनंद की इक लहर बह जाने दे।
आओ तुमको वीर शहीदों की गाथा बतलाता हूं अरे आजादी के दीवानों की कुर्बानी दोहराता हूं आओ तुमको वीर शहीदों की गाथा बतलाता हूं अरे आजादी के दीवानों की कुर्बानी दोहरा...
यूँ इस दुनिया से जाने के बाद भी हमारी कहानी को … उस के शब्दों को आबाद करेंगे यूँ इस दुनिया से जाने के बाद भी हमारी कहानी को … उस के शब्दों को आबाद करेंगे
अधर्म राह का करके पालन और असत्य का उच्चारण , धर्मराज से धर्म लुप्त था और कृष्ण से सत्य अधर्म राह का करके पालन और असत्य का उच्चारण , धर्मराज से धर्म लुप्त था और कृष्...
हम उनका सोचा करते थे , दिल से निभाया करते थे l हम उनका सोचा करते थे , दिल से निभाया करते थे l
आकाश के तारे गिनना चांद की सुंदरता को निहारना आकाश के तारे गिनना चांद की सुंदरता को निहारना
अपने आसपास एक जादू बना के रखते हैं। हर दिशा में इनके मुंह, कान और आंख होते हैं। अपने आसपास एक जादू बना के रखते हैं। हर दिशा में इनके मुंह, कान और आंख होते है...
ये बेकरारी कैसी इस जान को किसकी तलाश क्यूं आवारा बंजारा बन भटक रहे हैं सब साज़, ये बेकरारी कैसी इस जान को किसकी तलाश क्यूं आवारा बंजारा बन भटक रहे हैं सब साज...
एक तरफ था पर्वत उंचा और एक तरफ गहरी थी खाई एक तरफ था पर्वत उंचा और एक तरफ गहरी थी खाई
रात के सन्नाटे में खौफ का साया हुआ-हुआ करता *शृंगाल भय को बढ़ाता आया। रात के सन्नाटे में खौफ का साया हुआ-हुआ करता *शृंगाल भय को बढ़ाता आया।
स्वच्छ हो भारत, स्वस्थ रहें सब - ये सन्देश जन-जन तक पहुँचाना है, स्वच्छ हो भारत, स्वस्थ रहें सब - ये सन्देश जन-जन तक पहुँचाना है,
प्रेम और भक्ति से बुराई पराजित हो जाता है । प्रेम और भक्ति से बुराई पराजित हो जाता है ।
व्यथा व्यथा
मैं किसी अलग पहचान की मोहताज नहींं मैं खुद एक पहचान हूं। मैं किसी अलग पहचान की मोहताज नहींं मैं खुद एक पहचान हूं।
और फिर टिनटिन यान में बैठकर अंतरिक्ष की लम्बी व् रोमांचक यात्रा पर निकल पड़ी। और फिर टिनटिन यान में बैठकर अंतरिक्ष की लम्बी व् रोमांचक यात्रा पर निकल पड़ी।
अपने कर्मों से बनती जग, पुरुषत्व की यही परिभाषा।। अपने कर्मों से बनती जग, पुरुषत्व की यही परिभाषा।।