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Sudha Sharma

Classics

4.5  

Sudha Sharma

Classics

माॅं

माॅं

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तेरी कल्पनाओं से आगे होती उसकी ऊॅंची उड़ान, 

तन मन से प्रयास रत वह रखने को तेरी चिर मुस्कान।

सपनों के सागर में धोती नित आशा के सच्चे मोती,

तू कितना भी कर्कश हो जा उसकी ममता न कम होती।

सर्वस्व न्योछावर करती माॅं फिर भी न मन में तनिक रोष,

प्रेम निधि न रिक्त कदापि ऐसा अक्षय अमूल्य कोष। 

दुनिया की कोई हस्ती भी समक्ष न उसके ठहर सकी,

ऐसी मिट्टी से गढ़ डाली ईश्वर ने वो महान कृति।

हर रूप में वंदनीया वह चाहे निर्धन हो या धनवान, 

त्याग तपस्या बलिदान में उसका अद्भुत है रूप महान।। डॉ सुधा शर्मा आर्या 


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