अति का परिणाम
अति का परिणाम
अति का परिणाम
विज्ञान तुम काम करो जग में ऊॅंचा नाम करो,
रहे स्मृति पटल पर इतना मानवता हित काम करो ।
मानव तो है क्रूर बड़ा कब उस पर नियंत्रण तेरा,
दे अपार शक्ति अनंत न क्रूरता का परचम लहरा ।
ईश्वर ने बड़े प्यार से इस सृष्टि का निर्माण किया,
मिला तनिक सा स्वांश मानव का कल्याण किया।
लेकिन मानव अहम् में चूर भूल गया सारे दस्तूर,
स्व अहम् जीवित रखने को करता नियम चकनाचूर।
मानव अहम् की सीमा नहीं नियंत्रण में गुरुर नहीं,
काल की कठपुतली है पर काल से भयभीत नहीं।
हिंसा का नंगा नृत्य करें मानवता हित न विचार धरे,
झोंक विश्व को युद्धाग्नि में निज अहम् को संतुष्ट करें।
विज्ञान मध्यम मार्ग अपना मनुष्य का न अस्तित्व घटा,
सारे कौशल छीन मानव के मानव को न अपंग बना।
परस्पर संबंध घटा जन के ना आपस में बैर बढ़ा,
अति विनाशकारी होती इतना सबको मर्म सिखा ।
अति गर तेरा संग होगा निष्क्रिय जन जीवन होगा,
अंग प्रत्यंग शिथिल होंगे अंगों का न क्रियान्वयन होगा।
भूख प्यास सब स्वप्न बनेंगे जीवन अस्तित्वहीन होगा,
सुख समृद्धि बढ़ जाएगी जीवन मूल्य निमग्न होगा। डॉ सुधा शर्मा आर्या
