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Sudha Sharma

Inspirational

4  

Sudha Sharma

Inspirational

मुक्तक

मुक्तक

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4

मोबाइल पर कुछ मुक्तक 

मोबाइल कलयुगी मात पिता,
सखा बंधु व भ्रात।
मोबाइल बिन न भाए भैया,
समक्ष रखा भात ।।

मोबाइल के आसरे, 
कटते दिन और रैन। 
मोबाइल न हो हाथ में, 
भटके इत उत नैन ।। 

जो चाहे सो देखिए ,
मोबाइल पर पूरा ज्ञान।
पांच साल का बालक बने, 
पच्चीस का नौजवान ।।

मोबाइल के कारणे, 
पूर्ण समाज से दूर ।
बच्चे खेले गेम्स तो, 
बूढ़ों पर बरसे नूर ।। 

मोबाइल बचपन छीन रहा, 
सामाजिकता छिन्न भिन्न ।
मोबाइल आज का देवता, 
कोई हो सके न उऋण।।

मोबाइल के कारणे, 
नित बच्चे खाते डांट,
मोबाइल न छूट सके, 
छूटे चाहे मां-बाप।।

मोबाइल पर हो जाती,
बिन अस्त्र लूट और पाट।
पल में करोड़ों की ठगी, 
रोते ग्राहक दिन रात।। डॉ सुधा शर्मा आर्या 


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