जीवन पर्व है
जीवन पर्व है
जीवन पर्व है
जीवन गरल सुधा सा है,
किसको छोड़ूॅं किसको पाऊॅं।
जीवन के भीषण रण में,
क्यों न महायोद्धा बन जाऊॅं।
जीत होगी या हार होगी,
एक निर्णय तो निश्चित है।
लड़कर ही बलि चढ़ जाऊं,
और शहीद का दर्जा पाऊं।
कायर बनने से अच्छा,
क्यों न समर में उतर जाऊं।
मानव हूॅं मानव बनकर,
मनुष्यता का मान बढाऊॅं।
जीवन जब संघर्ष है तो,
क्यों संघर्ष से आंख चुराऊॅं।
आनंद का उत्सव समझकर,
जीवन को एक पर्व बनाऊॅं। डॉ सुधा शर्मा आर्या मेरठ
