वृक्ष बनने की चाह
वृक्ष बनने की चाह
कविता
वृक्ष बनने की चाह में,
बीज को गलना पड़ता है।
मिट्टी के गर्त में छुपकर,
तमस से लड़ना पड़ता है।
सहकार रवि की प्रखर किरण,
वर्षा झेलना पड़ता है।
सरल नहीं वट वृक्ष बनना,
त्याग तपस्या श्रम चाहिए।
शीतल छाया देने हित,
झुलसना तपिश में पड़ता है।
वट वृक्ष बनने की इच्छा,
न अन्य वृक्ष की जड़ काटो।
सब कुछ इसी धरा पर है
सुधा जरा स्वयं को साधो हो। डॉ सुधा शर्मा आर्या की कलम से
