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Sudha Sharma

Inspirational

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Sudha Sharma

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स्वावलंबी

स्वावलंबी

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हर रिश्ते ने पुकारा हमें, 

लेकिन हमको निहारा नहीं।

सब इतने स्वार्थ लिप्त थे,

कि बने कोई सहारा नहीं। 

समझते रहे बरगद उनको,

पर वह सूखी टहनी मिले।

उनके समक्ष गर अश्रु झरे,

तो अस्तित्व अपना ही हिले। 

सब की छत्रछाया में हमने,

पाठ अनोखा यह पढ़ डाला।

उनकी कृपा मात्र से हमने,

स्वावलंबी चरित्र गढ़ डाला।।


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