लम्हें ज़िंदगी के
लम्हें ज़िंदगी के
नीम की निंबोलियां
कीकर के झूले
बेरियों के बेर
रेत के टीले
बस वो ही थे
लम्हे ज़िंदगी के
एक थान में से
सबके कपड़े
मां के पास सोने के लिए,
आपस में किए खूब झगड़े
बस वो ही थे
लम्हे ज़िंदगी के
सावन में मामा लाते
बताशों की पोटली
नानी की गुजिया
दादी के आंगन कि ओखली
बस वो ही थे
लम्हे ज़िंदगी के
वो टेलीफोन का कनेक्शन
सारे पड़ोसियों का एक ही नंबर
वो टी वी का चित्रहार
सबके चेहरों पर ले आता बहार
बस वो ही थे
लम्हें ज़िंदगी के।
